Monday, December 30, 2013

गजल-१६१ 

जगतकेँ नब रूप देखितहुँ
सहत जे से भूप देखितहुँ

फटकि फेकति दोष सभकँ से
सहज गुनगर सूप देखितहुँ

पियाबित नित नेह नीर से
भरल मिठगर कूप देखितहुँ

जहाजक सन तेज चालि आ
तनल हिय मस्तूप देखितहुँ

बहुत नै राजीव थोरबो
नवल नित प्रारूप देखितहुँ

122 221 212
@ राजीव रंजन मिश्र 

Sunday, December 29, 2013

गजल-१६० 

गोपी उद्धव सम्बाद पर एक गोट गजल :

सखि हे टान उठल ई केहन 
डाहल मोन सिझल ई केहन 

के पतिया क' सुनत बूझत गप 
माधब प्राण हतल ई केहन 

हिय बेचैन दरस नै भेटल 
ब्रज तजि श्याम रहल ई केहन
 
निष्ठुर साफ़कँ बिसरल सभकेँ 
गाँछल बात नटल ई केहन 

हिय राजीव हकासल सन आ 
आँखिक निन्न उड़ल ई केहन 

२२२१ १२ २२२ 
@ राजीव रंजन मिश्र

Tuesday, December 24, 2013

गजल-१५९ 

जखने दुनिया किछो गलत कहतै
तखने आंगुर तुरत सचर उठतै

किछुओ ठानब त' फेर थम्हने रहब
ठानल लोके त' किछु गजब गढ़तै

बोलक टाँसी रहत जँ कम तहने
नेहक पुरबा मधुर सरस बहतै

लागल रहलासँ जोहमे अनुखन
भन्ने देरीसँ धरि अबस लहतै

कतबो राजीव दाबि राखब धरि
झंडा सतकेँ शिखर चढल रहतै 

२२२ २१२ १२२२  
@ राजीव रंजन मिश्र 

Sunday, December 22, 2013

गजल-१५८
आजुक दिन मैथिलीकेँ संविधानक अष्टम सूचिमे स्थान भेटल छल तैं एकर पालन अधिकार दिवसकेँ रूप में करैत छी हम सभ,किछु फुराएल आ टंकित काएल गेल,प्रेषित अछि माँ मैथिलिक सेवामे,ज्ञानी गुनी जन आ मित्र बंधु लोकनिक स्नेहाकान्क्षी रहब :
भीख नै अधिकार चाही 
आब नै किछु आर चाही 

आउ नबतुरिया अहाँकेँ 
बुधि बलक हथियार चाही 

कर्मेकेँ मोजर करी आ 
जुल्मकेँ प्रतिकार चाही 

नित रहथि संगे बनल ओ  
बूढ़केँ सत्कार चाही  

मांग सभटा ठीक छै धरि 
संग आ सरियार चाही 

चानपर छी जा चुकल तैं 
चानकेँ किछु पार चाही 

मोनकेँ दमका दए से 
रस भरल रसधार चाही 

मैथिलीकेँ मान हो आ 
मायकेँ मनुहार चाही 

छी रहब मैथिल सदति बस 
यैह टा गलहार चाही 

जागि ई मिथिला चुकल अछि
हिय भरल अंगार चाही 

ली शपथ राजीव आबू
माथ परका चार चाही 

२१२ २२१ २२ 
@ राजीव रंजन मिश्र 

Saturday, December 21, 2013

गजल-१५७ 

फुफकार कम मारू 
किछु काजकेँ बाजू 

अपना कमी खातिर  
अनका त' नै दाबू 

हद भेल यौ आबो  
सोचू अपन बाबू 

बस टांग झिकला पर 
अनकर बढब आगू 

राजीव संगे मिलि 
इतिहास नब रचाबू 

२२१ २२२ 
@ राजीव रंजन मिश्रा 

Friday, December 20, 2013

गजल-१५६ 

पाँचो आंगुर नै समान होइछ कहियो
कहबी डाकक नै पुरान होइछ कहियो


देखल अन्हरिया रातिमे उगल दिनकर बा
दुपहरियामे भेँट चान होइछ कहियो


मोजर सदिखन एकमात्र करनीटाकेँ
अनढन भखला पर कि मान होइछ कहियो


कतबो अरजब नोचि नाचि से कम्मे धरि
विज्ञ लोकक नै सिमान होइछ कहियो


निक मनुखक राजीव एक टा पहिचान जे 
कथमपि छाती नै उतान होइछ कहियो


2222 2121 2222
@ राजीव रंजन मिश्र 

Wednesday, December 18, 2013

गजल-१५५ 

गाछीमे आम नै फरए छैक
गामो नै गाम ओ लगए छैक 

चूल्हा चेकी बखाड़ी जाँतक त'
नामे सुनि कानकेँ मलए छैक 

की देखब हाल नबतुरियाकेर
नेन्ना भुटका जाममे मतए छैक 

मीता बहिना त' पुरना गप भेल
अपनेमे लोककेँ बझए छैक 

बोली बिसरल अपन माएकेर
अलगे किछु टोनमे बजए छैक

बजने चढि बढिकँ मोजर भेटत कि
ककरो क्यउ आब नै सहए छैक

बाँचल मिथिला शहरमे राजीव
गामेमे मैथिली झखए छैक
२२२ २१२ २२२१ 
@ राजीव रंजन मिश्र 

Monday, December 16, 2013

गजल-१५४ 

एक झोंका पवनकेँ गुजरि गेल देखू
मोन मारल सिनेहक सिहरि गेल देखू

कान सुनलक जँ किछुओ हुनक बोल नेहक
सोह बिसरल उचाटे नमरि गेल देखू

चानकेँ आसमे छल चकोरक नजरि धरि
राति कारी अमावस पसरि गेल देखू 

के बुझत बात डाहल हदासल हियाकें
गाछ रोपल सवाँरल झखरि गेल देखू  

बाट जोहब सदति बस बनल भाग टा तैं
नोर राजीव नैनक टघरि गेल देखू 

२१२२ १२२ १२२१ २२ 
@ राजीव रंजन मिश्र

Friday, December 13, 2013

गजल-१५३ 

हियक अहलादकेँ फुसियाएब मोसकिल छल
सुनल सभ बातकेँ बिसराएब मोसकिल छल 

उगल छल चान जे पूनमकेर रातिमे ओ
तकर मारल हियक सरियाएब मोसकिल छल 

सलटि लेलहुँ जगतकेँ सहजेसँ नित मुदा बस
बढल अनुरागकेँ अनठाएब मोसकिल छल

गुलाबक फूलसन जगती खुब बिहुँसलए धरि
भरल मधुमासमे मुसकाएब मोसकिल छल 
  
बड़ा राजीव छल ललसा दौग मारएकेँ 
झटकि धरि डेग नित चलि पाएब मोसकिल छल 

१२२ २१२ २२२१ २१२२ 
@ राजीव रंजन मिश्र 

Wednesday, December 11, 2013

गजल-१५२ 

बस मान खातिर नै बजबाक चाही कखनो
हिय तोड़ि लोकक नै चलबाक चाही कखनो

बाजब त' बाजू छाती ठोकि सत टा सदिखन
बेकार फुइसक नै हकबाक चाही कखनो 

जे बेश हल्लुक बुझना गेल देखति माँतर
से बाट चटदनि नै धरबाक चाही कखनो 

नै ऊक बिनु फूकक छजलै ग' ककरो से बुझि
बुधि ज्ञान सहजे नै तजबाक चाही कखनो 

राजीव अलगे करमक धाह आ चमकी तैं
कुटिचालि कथमपि नै रचबाक चाही कखनो 

२२१ २२२ २२१ २२२२   
@ राजीव रंजन मिश्र

Sunday, December 8, 2013

गजल-१५१ 

आब आर कि पार हेतए 
ताकि ताकि शिकार हेतए 

छद्म भेष धरत त' फेर ओ 
दोहराकँ बिमार हेतए 

राज धर्म कठिन त' बाट धरि 
एक ठाम कछार हेतए  

एक बेर जँ हूसि गेल से 
शेर फेर सियार हेतए  

सोच नीक जँ लोक बेदकेँ 
दूर हारि बिकार हेतए  

रंग भेद सफल कखन रहल 
लोकतंत्र लचार हेतए 

सोच यैह रहत सदति हमर 
वीरकेर श्रिंगार हेतए  

बाट घाट चलब त' सीख ली 
जीत जैब कि हार हेतए  

२१२१ १२१ २१२ 

@ राजीव रंजन मिश्र  

Saturday, December 7, 2013

भक्ति गजल-७ 

आइ वियाहपंचमी पर अपने लोकनिक सोँझ प्रेषित अछि हमर ई अकिंचन भाब चेष्टा,माँ मैथिलीकँ सेवामे :



चलू सखि देखि आबी सभ सुनर छवि राम सीताकेँ
जनकपुर धाम अछि सजल बढल दियमान मिथिलाकेँ

सुनयना आइ बिलखएथि दुल्हा रामकेँ लखि लखि
विरल जोड़ी जनकललीक अवधपति राम ललनाकेँ 

धिया सुकुमारि छथि भरल पुरल गुण ज्ञानकेँ अनुपम
लला रघुवर सरल हियक मुदा संज्ञान दुनियाकेँ 


बराती रूप गुण भरल मनोहर साज सज्जित सभ
जनक राजा हुलसिकँ बेश जोड़थि हाथ पहुनाकेँ 

सिनुरदानक निरखिकँ छवि मगन राजीव तिरपित बड़
धरथि नब रूप बानि ओहने धिया फेरोसँ मिथिलाकेँ 

122 2121 2122 21222

@ राजीव रंजन मिश्र

Friday, December 6, 2013

समस्त मित्र मंडलिक अगाध सिनेह आ उत्साहवर्द्धनकेँ बले आइ एक सए पचासम गजल प्रेषित अछि अपने लोकनिक सोँझा,स्नेहाकांक्षी रहब अपने लोकनिक सुझाब आ विचारक :

गजल-१५० 

नै हिन्दूकेँ आ नै मुसलमानकेँ हेतए 
छल बुधियारक आ फेर बुधियारकेँ हेतए 

ओ दिन फेरो देखत ग' ऐ माटिकेँ लोक यौ 
चप्पा चप्पामे राज सुख शानकेँ हेतए 

जखने राखब यौ भाइ लोकनि बचल होशटा 
मोजर तहने नै चोर गद्दारकेँ हेतए 

मन्दिर मस्जिद रोड़ा बनत नै अपन बाटकेँ 
ओ बस मानक भगवान अल्लाहकेँ हेतए 

जानब सभदिन राजीव विस्वास बड़ पैघ गप 
सरिपहुँ देखब टा जीत हकदारकेँ हेतए

२२२२ २२१२ २१२ २१२ 
@ राजीव रंजन मिश्रा 

Sunday, December 1, 2013

गजल-१४९ 

आइ हमरा लोकनिक संस्था मिथिला सेवा समिति चैरिटेबल ट्रस्ट दिसिसँ रक्तदान शिविरक आयोजन कएल गेल छल,नीक जकाँ संपन्न भेल। विद्यापति भवन (आयोजन स्थल)मे बैसल बैसल किछु निकलि गेल,प्रेषित अछि अपने लोकनिक सोंझा किछु छायाचित्रक संग.… हमर विनम्र निवेदन सभ मित्र बन्धुसँ जे फूजल हियसँ सुविधा हिसाबे नियमित रूपसँ शोणित दान करी,हमरा सभक देलहा खून ककरो जान बचा सकैत अछि :  

रक्तदान सन दान नै किछु थिक
ऐसँ पैघ कल्याण नै किछु थिक


दाइ माय यौ भाइ एकर सन
धर्म आर बढि आन नै किछु थिक 


लागि जाय शोणित जँ ककरोमे
मोन चैन नुकसान नै किछु थिक


बेर काल सभ ठाम गोहारब
देब खूनसे भान नै किछु थिक


दोग कोन राजीव नै भागू
देह चोरिमे मान नै किछु थिक


2121 221 222
राजीव रंजन मिश्र

Saturday, November 30, 2013

गजल-१४८ 

जिनगी जीबाक नाम रहल सभदिन
नुनगर सेकल बदाम रहल सभदिन 

बेसी फटिया क' मोन चढ़ा भखने 
लोकक दरजा त' आम रहल सभदिन 

चारि आखर सिनेहक बले देखल 
भरिगर सुधिगर तमाम रहल सभदिन 

सुख दुख सहबाक नाम कलाकारी 
भागक तखने सलाम रहल सभदिन 

के कहलक जे सुरा त' रमनगर छै 
मारुक जोहक त' जाम रहल सभदिन 

मानब राजीव बात सदति ठोकल 
करनी टाकेँ त' दाम रहल सभदिन  


२२२२ १२१ १२२२ 
@ राजीव रंजन मिश्र 
गजल-१४७ 

गाममे छी, घरसँ सटल पोखरिक अनुपम प्राकृतिक छटा देखि नै रहल गेल...किछु कहि गेलहुँ,सचित्र प्रेषित अछि 
अपने लोकनिक सोझाँ :

बगुला बैसल जाठिपर
आँखिक पुतली माछपर

लोकक सदिखन सोच धरि
टांगब सभकेँ चाँछपर

के बूझत गप आनकेँ
सभकेँ धाही चानपर

भेटल नै सहजे कमल
चिक्कन चुनमुन घाटपर

अकुलायल राजीव छी
तुरछल अपने आपपर

2222 212
@ राजीव रंजन मिश्र

Tuesday, November 26, 2013

गजल-१४६ 

देहक लहसन आ सम्बन्ध कहियो नै मिटाइ छैक
कतबो चाहब धरि मुइलाक बादो संग जाइ छैक 

उनटा सोचक ई अपने सभक फल भेल जे बिसरिकँ
लोकक जिनगीमे देखब त' सभकिछु आइ पाइ छैक 

नेहक मूरति छल सभदिनसँ घर घर नारि जाहि ठाम
तहिठाँ कुबिया मारल जा रहल नित माय दाइ छैक 

अबिते माँतर जे छल जन्म जन्मक बनल भजार
तकरा बिसरा शोणितकेँ पियासल भाइ भाइ छैक 

खहरल अपनेमे गुमसुम परल राजीव भोर साँझ
विधना बाजू ने एकर जँ किछु मिरचाइ राइ छैक 

२२२२ २२२१ २२२१ २१२१ 
@ राजीव रंजन मिश्र 

Sunday, November 24, 2013

गजल-१४५ 

दू घोंट अपना हाथे आइ पिया दिय' प्रिये
बस चारि आखर नेहक फेर सुना दिय' प्रिये 


कनि आउ संगे बइसू हाथ धरू हाथमे
किछु चाह बेकल मोनक पुरा दिय' प्रिये


दू नैन काजरकें लजबैत गरल तीर सन
ई प्राण कोना बाँचत बाट सुझा दिय' प्रिये 


रूपक गजल हम भाखब पी क' नेहक सुरा
किछु बोल हमरा गजलक आर फुरा दिय' प्रिये 


मारल जगतकें छी राजीव सदति सभदिनक
हकदार अपना नेहक आइ बना दिय' प्रिये 


२२१ २२२२ २११२ २१२
@ राजीव रंजन मिश्र 

Saturday, November 23, 2013

गजल-१४५ 

एक्कहु टा बात अलबल सोचब त' बेकार थिक
जिनगीमे दोग दागे भागब त' बेकार थिक 

मोजर लोकक सराहलकेर अलगे बुझब
अपने मोने जँ काबिल साजब त' बेकार थिक
 
हाथक रेघाकँ बस रेघे मात्र मानब उचित
भागेंकें रहि भरोसे टीकब त' बेकार थिक 

छल काजक लोक ओ जे पजिया क' सदिखन चलल 
फटकीमे रहिकँ लारब चारब त' बेकार थिक 

फल करमक भोगहे टा राजीव सदिखन पड़त 
अगिलाकें मुँह अनेरे नोचब त' बेकार थिक 

२२२ २१२२ २२१ २२१२ 

@ राजीव रंजन मिश्र

Saturday, November 16, 2013

ओ दिन सेहो याद अछि जहिया भारत खेलयसँ पहिने हारि जाय छल आ आजुक दिन किछु कहबाक प्रयोजन नै,भारत क्रिकेटक बेताज बादशाह थिक खेलसँ ल' क' प्रशासनिक रुपे आ भारतीय क्रिकेटक भविष्य निश्चित रुपए पुरजोर इजोरियाक चान सन अछि,मुदा बिनु सचिन क्रिकेट? 
हाँ,हमहूँ अहाँ सभगोटे जकाँ क्रिकेट आ सचिनकेँ जबरदस्त प्रसंशक रही,छी आ रहब। …  आइ ओकर विदाइ काल करोड़ो देशवासीक आँखि नोरायल छल,नोर हमरो बहल आ संगे क्रिकेटक बेताज बादशाहक लेल किछु शब्द सेहो,साझा करए चाहब अपने लोकनिक संग : 
ओ वीर आइ कना देलक
खन चारि लेल झिमा देलक 

शाबाश शेर क्रिकेटक ओ 
सभ कीर्तिमान धसा देलक 

सैकड़ करोड़ हियाकेँ ओ 
सभ ठाम मान दिया देलक 

धनबाद ओइ गर्भकेँ जे 
दियमान चान चढ़ा देलक 

खेलल क्रिकेट त' तेंदुलकर
छक्काक टाल लगा देलक
 
छोड़ल जखन त' सचिनकेँ सभ 
नोरैल आँखि विदा देलक 

करनी विचार धवल तेहन 
भारतकँ रत्न बना देलक 
२२१ २१ १२२२ 
@ राजीव रंजन मिश्रा   

Friday, November 15, 2013

गजल-१४३

किछु लोहाक आ किछु लोहारक दोष छल
धरि लोकक हिसाबे सभ भागक दोष छल

नित बुधियार मानल एक्के टा गप्पकेँ
आनक नै किछु अपने काजक दोष छल

सभ निकहा त' अरजल अपने सुधि बुधि बले 
बस अधलाह खन सभटा आनक दोष छल

नै पलखैत अछि ककरो लग देखत सुनत
घर बिलटल त' सेहो सरकारक दोष छल 

धरि ठेकान राखल करमक राजीव जे
तकरा नै कनिकबो जोगारक दोष छल 
२२२१  २२२२  २२१२ 
@ राजीव रंजन मिश्र 

Wednesday, November 13, 2013

गजल-१४४ 

सहजोरकेँ सहकब छजए छैक
कमजोर अनढनकेँ मरए छैक 


बेछोह दरदो सभटा सभदिनसँ
पछुऐल सभतरहेँ सहए छैक 


अधलाह ओ काजे सदिखन भाइ
जे लोक हरसट्ठे करए छैक 


बुधियार लोकक सभटा ऐ ठाँम
बातेसँ मोसल्लम चलए छैक


भागे भरोसे भेटित सभकेँ  त'
सुतलासँ ककरा किछु लहए छैक 


राजीव मानल टा सनकेँ बात
बपजेठ बढि चढ़ि नित भखए छैक 

२२१ २२२ २२२१ 
@ राजीव रंजन मिश्र 
गजल-१४२ 

नेह सेहो शर्तक संग छैक आइ
लोक मारल मोनक दंग छैक आइ

कोन तरहे बाँचत लोक मोन मारि
भेल सगरो अजगुत रंग छैक आइ

के करत कोना निरबाह बोल केर
हिय सिनेहक डाहल तंग छैक आइ

तान बदलल लोकक छोऱि छाऱि नेह
भास करगर देहक अंग छैक आइ

कोन बातक थिक राजीव कष्ट घोर
बेलगामक सभ सारंग छैक आइ

2122 2221 2121
@ राजीव रंजन मिश्र

Tuesday, November 12, 2013

गजल-१४१ 

लोक ऐठा हँसि हँसि क' सभ बात कहि जाइ छैक
आर किछु हो नै हो थमल नोर बहि जाइ छैक

के सहत सदिखन बात ककरो ठरल आइ आब
मोन नेहक नेहाल पतिया क' सहि जाइ छैक 

किछु रहल नै हाथक अपन साध कहियो त' भाइ
सोच सुलझल बेबाक नै सभकाल लहि जाइ छैक 

देखबामे आओल सभदिनसँ जे सोझसाझ
बुरिबलेले आ सभसँ बेकार रहि जाइ छैक

सत्त मोनक राजीव सहजोर टा नित बचल ग'
झूठ ठामेकेँ ठाम सरकार ढहि जाइ छैक

२१२२ २२१२ २१२ २१२१
@ राजीव रंजन मिश्र

Monday, November 11, 2013

गजल-१४० 

आँखि जखने फूजल भोर भेल बूझब 
बान्हि राखब आइर पाइन गेल बूझब 

गप सदति सभदिनका छैक ई सराहल 
काट सभ दिक्कतकेँ तालमेल बूझब 

चारि टा कनहा मुइलोकँ बाद लागत 
लरि क' भिन्ने नित रहनाइ जेल बूझब

एकसर ब्रेहस्पतियो झूठ लोक भेला 
सर समांगक बल अनमोल तेल बूझब 

के ककर ठीका राजीव लेल कहियो 
बोल दू गो नेहक प्राण देल बूझब  

२१२२ २२२१ २१२२ 
@ राजीव रंजन मिश्रा 

Sunday, November 10, 2013

भक्ति गजल-५ 

अनुपम छबि लखि नित बिभोर छी
माधब तौँ शशि हम चकोर छी


अन घन लछमी अंग अंगमे
भरिगर तौँ बस जग त' थोऱ छी


राधा रानी संग बाम दिसि
नख शिख अपरुप महि इजोर छी 


अनुखन राखह निज चरण शरण
सहकल बहकल सठ अघोर छी 


बिसरल जग राजीव भाबमे
लागल ठकबक गरबकोर छी


222 221 212
@ राजीव रंजन मिश्र 

Saturday, November 9, 2013

गजल-१३९ 

घोघक तरक चान सोझा जे एलए
गगनक नुका चान लाजे ओ गेलए

चाहल मुदा ताकि उपमा भेटल कहाँ
परियो हुनक सोंझ पापड़ टा बेलए

मोनक कहब हाल ककरा मीता अपन
हिलकोर रहि रहि करेजामे ठेलए

बाजब हुनक जनि मधुर नेहक गीत सन
छोहक घऱी मोन कोना ई झेलए

राजीव भासल दहा कोनो होश नै
पागल सनक मोन फेरो जे भेलए

बहरे सगीर (२२१२ २१२२ २२१२) 
@ राजीव रंजन मिश्र 

Tuesday, November 5, 2013

गजल-१३८ 

समय सभ किछु बुझा दए छै
सबक सभटा सिखा दए छै 


सगर महि जीत लेब कतबो
अपन अपने हरा दए छै


पियरगर माय बापकेँ मुहँ
अगनि बेटा लगा दए छै


हिला जकरा सकल नै किछु
पटकि चिन्ता गला दए छै


सुनब राजीव मोनकेँ नित
सहज ऐना लखा दए छै

1222 12122
@ राजीव रंजन मिश्र 

Monday, November 4, 2013

गजल-१३७ 

ईजोतक पावनिकेँ हल्ला बना देलक लोक
सुड्डाहल टाका मोहल्ला उड़ा देलक लोक 


हो कोनो अबसर कतबो जे पवित्र होइक साँझ
सगरो देखू दारुक नल्ला बहा देलक लोक 


बहुतोंकेँ नै दू कौर टाकेँ जोगार
दाबल दानाकेँ आ गल्ला सड़ा देलक लोक 


अपनों घर नै सम्हरल जकरा बुते सरकार
गामे गामे बातक बल्ला चला देलक लोक 


कत्ते अछि जीबट से देखल गुम राजीव
दिन देखारे सतकेँ कल्ला दबा देलक लोक 


२२२ २२२ २२१२ २२२१ 

@ राजीव रंजन मिश्र


Sunday, November 3, 2013

गजल-१३६ 

जगमग जोति दिया-बातीकेँ
हरषल लोक बिसरि सातीकेँ

अजगुत रंग रहल सभदिनका
बिसरल पीर जुरा छातीकेँ

चाहब लाख मुदा नै सपरत
बाबत गान कलम पातीकेँ

आँगन द्वारि सजल छल जेना
अनमन रूप त' अहिबातीकेँ 

हो राजीव सभक जिनगीमे
चैनक राति चहक प्रातीकेँ 

2221 12222
@ राजीव रंजन मिश्र 

Saturday, November 2, 2013

गजल-१३५ 

समस्त मित्र बंधुकेँ दीया बातिक हार्दिक मंगल कामनाक संग प्रेषित अछि हमर ई गजल:

मंगल दीप जराकँ राखब
सदिखन माथ लिबाकँ राखब 

साथे साथ रहत ग' दुख सुख
हल्लुक मोन बनाकँ राखब 

निसि वासर त' मनत दिवाली
जा धरि बानि सजाकँ राखब 

ज्ञानक दीप इजोर देखा
घुप अन्हार मिटाकँ राखब


करनी ऊँच वचनसँ मधुगर
गामक गाम जुराकँ राखब 

बड अनमोल मनुखकँ काया
अनुदिन लाज बचाकँ राखब


राजीवक त' रहत विनय जे
लचरल गेह उठाकँ राखब

2221 12122
@ राजीव रंजन मिश्र 

Thursday, October 31, 2013

गजल-१३४ 

अहाँ बिनु साँझ उदास रहल
हदासल मोन निराश रहल


हियाकें हाल पजोर सनक
दबल बड रास भड़ास रहल


बनल छल मोनकँ मीत सुरा
निपत्ता भूख पियास रहल


कहब ककरासँ सुनत त' हँसत
उताहुल लोक पचास रहल 


मरल राजीव खहरि क' बुझू
त' जिबिते आब लहास रहल 


122 211 2112
@ राजीव रंजन मिश्र 

Wednesday, October 30, 2013

गजल-१३३ 

खन खन मोन ई अकुलाएल बहुत छल
भेटल लोक नित भसिआएल बहुत छल 


बाजत सभ अनेरक खटरास करत बस 
पकरल हाथ तैं गरमाएल बहुत छल 


भ्रष्टाचार मेटेबा लेल कहत टा 
नित धरि नोटकें तहिआएल बहुत छल 


के मानत ककर अभिमानक त' भरल सभ
अवसरपर नमरि घिघिआएल बहुत छल 


जैं राजीव सदिखन भगवान सचर बड
बारल लोक तैं सरिआएल बहुत छल   


२२२१ २२२२ ११२२
@ राजीव रंजन मिश्र 

Tuesday, October 29, 2013

गजल -१३२ 

कानि कानि शोणित नित बहल नोरकेर
यैह थिक पिहानी टा बचल लोककेर 

संग साथ के ककरा रहल बेर काल
चारि शब्द झूठक ढोंग थिक शोककेर 

जीबएत सुधि नै लेत क्यौ भोर साँझ
धरि मरैत माँतर भोज तिलकोरकेर

दान देत बाभनकें भरत पेट जमिकँ
बाल बूढ़ बिलटल सुधि कहाँ टोहकेर

अंग अंग राजीवक शिथिल भेल हारि
लोक वेद रतुका संग छल भोरकेर

२१२ १२२ २१२ २१२१ 
@ राजीव रंजन मिश्र 

Sunday, October 27, 2013


गजल-१३१ 

चहुँ कात एक्कहि रंग देखलहुँ
नै लोक लोकक संग देखलहुँ


चाहे  धनीकक बा गरीबक हो
सुख स्वप्न सभकेँ भंग देखलहुँ


अपने अपनमे लऱि झगऱि मिटल
छूछ्छोक खातिर जंग देखलहुँ


छल राति मजलिसमे ढरल मतल
भोरे तकर नब ढंग देखलहुँ


राजीव सेहन्ते लला रहल
धरि मोन सभकेँ तंग देखलहुँ

221 2221 212
@ राजीव रंजन मिश्र 

Friday, October 25, 2013

गजल-१३० 

लोक आइ काल्हि जोरदार भ' रहल अछि 
माल जाल सनक बैबहार क' रहल अछि

मारि धारि लूट पाट जमा क' मचेलक 
धर्मकेर संग बैभचार भ' रहल अछि 

लोकबेद कान काटि हाथ क' धरौलक 
बौक आइ काल्हि कैनहार भ' रहल अछि 

बात की करब समाजबादकँ जखन धरि 
स्वप्नचोर सेठ साहुकार भ' रहल अछि 

राम राम मोन माथ साफकँ हदासल 
दुख रहत मुदा कि होनहार क' रहल अछि 

२१२१ २१२१ २११ १२२ 
राजीव रंजन मिश्र 

Thursday, October 24, 2013

गजल-१२९ 

घिना क' राखि देलक सभटा सभ 
मनुख ध' बाट जोहक सभटा सभ 

बिता रहल पहर साँझक नेन्ना 
उठाकँ पेग जामक सभटा सभ 

करत कि काज लोकक ढेपा सन 
बनल समाज सेवक सभटा सभ 

जरल धहा क' अपने बुधिगर बनि 
भुखैल मान दानक सभटा सभ 

निचोड़ एक टा छल राजीवक 
पिजैल घाट घाटक सभटा सभ 

१२१ २१२२ २२२ 

राजीव रंजन मिश्र 

Wednesday, October 23, 2013


बाल गजल-१२ 
पिछला दू रातिसँ कनिक देरीसँ लौटबाक चलिते बेटी दुनूसँ भेंट नै भेल छल्ह,मोनो लागल छल्ह आ आँखियो फुजि गेल त' छोटकी बेटी विजयलक्ष्मी (गोलू) लेल कहल ई बाल गजल,प्रेषित अछि अहाँ सभक सोंझा:

गोलू रानी सूतल छथि
उनटा मूँहेँ घूमल छथि


बुझना जाइत अछि भरिसक
मोने मोने रूसल छथि

कखनो किछु नै खेतिह ई
छूछ्छे पेटे भूखल छथि

गुऱिया लेने पाँजरमे
अपनेटामे डूबल छथि

पप्पा ऐला सुनिते से
चटदनि कहली ऊठल छथि

राजीवक दुलरी बेटी
बड बुझनुक आ गूथल छथि

2222 222
राजीव रंजन मिश्र

Monday, October 21, 2013

गजल-१२८ 

जरुरतसँ बेसी भेटल मनुखकँ मर्म नै
प्रयोजनसँ बेसी राखब दबाकँ धर्म नै 

कहत बात ठोकल कोना करेज तानि क्यउ 
बनल मान दानक स्तम्भ जिरात कर्म नै

बोध ग्यान हारल मातल मनुख बनल असुर
सदाचार लोकक परिचय बनत ग' चर्म नै

नरम बोल आ लीबल माथ टेक नित बनत 
मुहँक बोल छुछ्छो करगर विचार गर्म नै 

भ' राजीव सभ निरलज मोहरा चलल सधल
लजा गेल दइबो धरि लोक टाकँ शर्म नै

१२२१ २२२२ १२१ २१२
@ राजीव रंजन मिश्र

Sunday, October 20, 2013



गजल-१२७ 

आइ साँझ बड भारी बुझा रहल
फेर मोन बड बेकल बना रहल 


बात बातमे लोकक कहल सुनल
हिय अनेर कारन छड़ पटा रहल 


के सुनत ग' बैथा मोनकेर ई
टाहि मारि दुख बिरहा सुना रहल 


ऐ उदास मोनक हाल के बुझत 
ओलि सभकँ सभ सभतरि सधा रहल 


साँच बाट चलि राजीव खसि पड़ल
मोन मारि बस धधरा मिझा रहल 

२१२१ २२२ १२१२
@ राजीव रंजन मिश्र 

Friday, October 18, 2013


गजल -१२६ 

चान राति सन सजल मुस्कान हुनक मारुक
जान प्राण हति रहल मुस्कान हुनक मारुक

अछि गजलकँ पाँति सन ओ ठोढ़ भरल रसगर
लखि हिया हहरि मरल मुस्कान हुनक मारुक


बात कत कहब ग' उपमा लेल हुनक आँखिक
चन्द्रमा लजा चलल मुस्कान हुनक मारुक


केश कारि मोसि सन फूजल त' बहल झरना
स्याह रातिमे धवल मुस्कान हुनक मारुक


छानि मारि दस दिशा राजीव कहाँ भेटल
छल मरीचिका बनल मुस्कान हुनक मारुक 


२१२१ २१२ २२१  १२२२ 
@ राजीव रंजन मिश्र 

Thursday, October 17, 2013

गजल-१२४ 

नै राम रहीमक झोक रहय   
नै वेद कुरानक टोक चलय 

किछु आर भने नै होइ मुदा
बस संग ध' लोकक लोक सहय 
 

नै ईद दिवाली भरिकँ मजा
आनंद सहित नित नेह लहय
  
हो राम रहीमक गान सदति
नै नामकँ खातिर जीव मरय 

राजीव सुनब नै लोककँ कहल
किछु लोक त' अतबे खेल करय 

२२१ १२२ २११२ 
@ राजीव रंजन मिश्र  
गजल -१२५  

कहियो रौदी त' कहियो तुफान मारि गेल
किछुओ बाँचल त' धसना धँसान मारि गेल

छोड़ल फज्जैत नै किछु कसाइ बाढि पानि
जुलमी सगरो घड़ारी बथान मारि गेल 

पूजल देवी सरिस मानि लोक धरि सएह 
कहियो कोशी त' कहियो बलान मारि गेल

कखनो राखल कहाँ लोक कनिकबो विचार
मौका फबिते सटासट निशान मारि गेल

खातेमे खेत खरिहानटा बचल भजार
करगर मिहनत अछैतो लबान मारि गेल 

देखल मिथिलाक राजीव हाल बेर काल
चुप्पेचापेसँ सभदिन सियान मारि गेल

२२२२ १२२ १२१ २१२१       
@ राजीव रंजन मिश्र

Tuesday, October 15, 2013

गजल-१२३ 

चान अहीँ कहू सहकतए कोना
राति पुनम बिना चमकतए कोना

रूप गढल कतेकबो रमनगर हो
फूल पवनकँ बिनु गमकतए कोना


लोक गमल प्रकृति बिसरि बिधानक गप
गाछ फले लुधकि मजरतए कोना


सभ रहत जँ चुप भ' गुण अपन गोए
ज्ञान सुधा बरसि तहन पसरतए कोना 


सोच सदति रहल फराक राजीवक
दीप मतल बुते पजरतए कोना  

2112 1212 1222
@ राजीव रंजन मिश्र 

Monday, October 14, 2013


गजल-१२२ 

विजयादशमिक शुभ मुहूर्तपर समस्त मिथिला-मैथिली,देशभरिक बंधु,बांधवीकें हमर सिनेह आ आदर भरल शुभकामना,भाब भरल दू आखर गजलक रूपमे :

विजयादशमिक हार्दिक शुभकामना अछि 
दोसर नै उपहार धरि सदभावना अछि 

जीतय निकहा हार अधलाहक सदति हो 
चेतन मोनक ई अटल अवधारणा अछि 

सुख सम्पति सौहार्दक नित दीप पजरै 
हो अज्ञानक दूर तम बस चाहना अछि 

भ्रष्टाचारी रावणक टा अंत होमय 
नीकक सभतरि जीत हो प्रस्तावना अछि 

सुधि बुधि लक्ष्मी हो भरल राजीव मिथिला 
गजले टा नै ई हमर उदगारना अछि 
२२२२ २१२२ २१२२ 

@ राजीव रंजन मिश्र 

Sunday, October 13, 2013


गजल-१२० 

खन खन मोन आकुल भेल अछि,विर्रोसँ लरि-जुइझ रहल भाइ बंधु लेल भगवानसँ आर्तनाद करएत हमर प्रार्थना …. अकुलाएल मोनक दू आखर,गजलकें रूपमे : 

हे नाथ आब कल्याण करू 
नै दोष मूढ़कें आब गनू 

छी हम अबोध अपाटक त' पतित 
धरि जाउ कोन दरबार कहू 

ई आगि पानि जल मेघ चढ़ल 
अधप्राण भेल छी त्रान करू 

किछु नब अबस त' गढ़बा क' रहब 
ली आइ फेर अवतार बरू 

बस एक आस विस्वास अहीँ 
राजीव ठाढ़ कर जोरि प्रभू 

२२१ २१२२ ११२ 
@ राजीव रंजन मिश्र 
१२.१०.२०१३ राति १०.४५ 

गजल-१२

बड दुख लागि रहल सभ लखिकँ
धरि किछु आब कहब की चढिकँ


मानल कोन पतित पतितपावनकँ
सहकल बानि मनुख तन रहिकँ


के मानल ग' ककर सरकार
सभकें मान भुवन सन बढ़िकँ 


बिसरल ज्ञान विवेकक पाठ
पलटल लोक कहल सभ गछिकँ


दोसर चाह कहाँ राजीव
राखथि नाथ सहज गति मतिकँ 


२२२ ११२ २२१
@ राजीव रंजन मिश्र
 


Saturday, October 12, 2013


गजल-११९ 

बड अजगुत ई रीति जगतकें 
देखल चुप रहि ठाढ़ खसलकें 

के राखल आवेग दबा आ 
के मानल अहलाद अपनकें

लोकक बाते बानि गड़ासा
खेलल नित धुरखेल बहसकें 

पावनि टालक टाल उठौलक
डाहल मोने भार रभसकें

जीहक चलते जीव चढ़ल बलि 
रोकत के राजीव चलनकें   
   
२२२ २२१ १२२ 
@ राजीव रंजन मिश्र 

Thursday, October 10, 2013

गजल -११८ 

घुरि फिरि ऐना नै  निहारल करू
रूपक नै किस्सा बघारल करू


बाँचब नै नेहक त' मारल प्रिये
खंजर नै नैनक उतारल करू


सजि गुजि नित दिन दहाड़े अहाँ
अँतरी ने लोकक ससारल करू


बड मारुक ई केश कारी सघन
फन्दा नै एकर पसारल करू


नेहक टा राजीव मारल मतल
बिसरा नै प्रियतम गछारल करू 


222 221 2212
@ राजीव रंजन मिश्र 

Wednesday, October 9, 2013

गजल- ११७
  
सभकँ धवल बसन छै राजनितक मैदानमे
जमिकँ मुदा मगन सभ चोरि गबन आराममे

बात करब ग' ककरा संग कखन कोना कहू
सभ त' बझल पड़ल नित चाम सुनर आ जाममे 

क्यउ चलल जँ लोकक नब्ज पकड़ि नेता बनल
वोट पड़ल बनल मंत्री ल' द' पसरल शानमे

मोन रहल कहाँ ककरो त' पढ़ल खाता बही
होश कहाँ क' घूरल खेत नहर खलिहानमे  

कोन हबा चलल देखू त' कनी राजीव ई
लोक घिना घिना नित फाटि रहल दिअमानमे

२११२ १२२ २११२ २२१२ 
@ राजीव रंजन मिश्र 

Tuesday, October 8, 2013


गजल-११६ 

हम बाटक अनजान पथिक छी
सत नेहक सदिकाल रसिक छी

जे भेटल से मानि चलल सदिखन
नै खोहिस सरकार अधिक छी

नै हाकिम नै लाट गवर्नर धरि
अपना मोनक ख़ास श्रमिक छी 

जे देखल से भाखि चलल सगरो
औ बाबू अहि मे लाज कथिक छी

बुझि राखल राजीव त' जिनगी ई
क्षणभंगुर आ चारि घऱिक छी 
२२२ २२१ १२२२ 
@ राजीव रंजन मिश्र 

Saturday, October 5, 2013


गजल-११५ 
सभ बात मोनक मोनेमे रहि गेल
सभटा अपन धरि सोचल सभ कहि गेल 

कोशिश रहल नै भिजबी आँखिक कोर
धरि नोर रतुका भिनसरमे बहि गेल 

के हाल बूझत बाजब कोना क'
देखल मधुरगर सपना जे ढहि गेल 

हम छी अपाटक मारल नित अपनेकँ
पजिया अनेरो अनको दुख सहि गेल

राजीव देखल निसि बासर ई खेल
बहुतोकँ पासा अनचोके लहि गेल
२२१ २२२२ २२२१ 
@ राजीव रंजन मिश्र